दीनके दयाल दाता ! मेरे दु:ख सारना || टेक || भौंर भौंर फेरा खाया , मानुजकी देह पाया कर्म - बंध मेंहि फंसाया , फेर मोरि वारना ॥ १ ॥ बालपना खेलत खोया , याद प्रभूकी ना कीया । तारुण जवानी पाया , पापि काम जारना ॥ ॥ २ ॥ तिरियाँ के संग भूला , दुर्जनों के साथ डूला । पापियों के पास झूला , भूल यह सुधारना ॥ ३ ॥ तीर्थ नेम कुछ ना कीन्हा , ताप जापभी ना चीन्हा । ऐसियोंको नाथबिना , कौन करे तारना || ४ || तेरोही अधार साँई ! दूज हमें कौन उपाई ? तुकड्या सहारा तूही , भूलको बिसारना ? ॥ ५ ॥