क्या किया ?
( तर्ज : मानूं ना मानूं ना मानूं रे ... )
क्या किया , क्या किया
क्या कियारे !?
तुने जीवन गमाय दिया ,
क्या किया रे ??
जिसे पाना था ,
उसको तो छोड दियारे ! ॥ टेक ॥
अमृत को छोड़ा , पीता शराब है ।
भगवान् के नाम
मुख मोड दिया , भैय्या ! ॥१।।
विषयों के फँदे में बांधा गया तू ।
सत समागम को
भूल गया , भैय्या ! ||२ ||
पैसों के खातिर करता मिलावट |
नेकी और नीती को
खोय गया , भैय्या ! ॥३ ॥
तनके घमण्ड से होगी फजिती ।
तुकड्या कहे जब
बुलाय लिया , भैय्या ! ।।४ ।।
तिरोडा ; दि . ४-१०-६२
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