तेरी माया तू ही जाने !
( तर्ज : तूचि कर्ता आणि करविता ... )
तेरी माया तूही जाने ,
हम क्या जाने , दिवाने ! ॥ हो ॥ टेक ॥
जिस किसने पहिचाना तुझको ,
वही जाने माया मंजिलको ।
अनासक्त वो रहे जगत्में ,
सुख - दुख दोनों समान माने ॥१।।
हम खाने - पीने के स्वादी ,
विषयोंके , रसनों के आदी ।
काम - क्रोध की सदा उपाधी ,
दूर न होती गाये तराने ॥२ ॥
किसने साथ न मोहब्बत बांधी ,
क्या होता है करी समाधी ?
अंदर तो स्वारथ की गंदी ,
मौज करे तीरथ के बहाने ॥३ ॥
कोई अवलिया वलि मस्ताने ,
जिसने अपनी मौत पछाने ।
तुकड्यादास कहे वहि जाने ,
हम उनके गाते गुण - गाने ॥४।।
सेवाश्रम - आमगंव :
दि . १८ - ९ -६२
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