जगे रहो हर हमेशा प्यारे !
बिना लगे प्रभु- प्रेम नहीं है ।
जगे हुए जो हुशार बंदे ,
उन्हें किसीका नेम नहीं है || टेक ||
यहाँपे देखो वहाँपे देखो ,
प्रीत बिना परतीत नहीं है
सभी जगहमें वह प्रेम देखो ,
जिस प्रेममें हार-जीत नहीं है ||१||
वह प्रेम पाकर जगा कबीरा ,
जहाँ किसीकी भीत नहीं है ।
सदा रहो अनमस्त निरामय ,
बिना प्रभूकोई मीत नहीं है ॥ २ ॥
जो प्रेमसे लौ लगी रहेगी ,
तो प्रेममे प्रभु रीत नहीं है
वह दास तुकडया उसी का प्यारा ,
बिनागुरु कहि होत नहीं है ||३||
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