अमरपुरीमें बजती हैं नौबत ,
आओ सखी ! मिल जायेंगे ॥ टेक ॥
त्रिकुट शिखरपर जोगि मनोहर ,
नित उत दर्शन पायेंगे ।
भ्रमर - गुंफा में गहरि है नदिया ,
सब सखियाँ मिल न्हायेंगे ॥ १ ॥
हृदयकमलमों निर्मल ज्योती ,
नित उत ध्यान लगायेंगे ।
नाभिकमलमों खड़ि है नैया ,
सीधी राह मिलायेंगे ॥ २ ॥
निर्मल जान दरसका भूखा ,
पाते वहि मिल जायेंगे ।
तुकड्यादास पिया -घर जावे ,
वापिस नहि फिर आयेंगे ॥ ३ ॥
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