हरगीज मेरा दिल मान रहा । जाना परदेश फिरानेको || टेक || टूट गया दाना -- पानी , हमरा इन नगरीवालोंसे थोडे दिनकी अब बाकी है , फिर बांधू गाँठ सिरानेको ॥ १ ॥ आज तलक इस नगरीमे खुब झोंकझाँक मौजे कीन्ही बस माफ करो रहनेवालो जाता हूँ धाम फिरानेको || २ || कुछ लायी थी गठडी घरसे वह दिलसे खत्म करी सारी अब याद हुजुरकी है मनमे तुकड्या यह नाम गँवानेको || ३ ||