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पोस्ट्स

एप्रिल, २०२३ पासूनच्या पोेस्ट दाखवत आहे

हरगीज मेरा दिल मान रहा

हरगीज मेरा दिल मान रहा ।  जाना परदेश फिरानेको || टेक ||  टूट गया दाना -- पानी ,  हमरा इन नगरीवालोंसे  थोडे दिनकी अब बाकी है ,  फिर बांधू गाँठ सिरानेको ॥ १ ॥ आज तलक इस नगरीमे खुब झोंकझाँक मौजे कीन्ही बस माफ करो रहनेवालो जाता हूँ धाम फिरानेको || २ || कुछ लायी थी गठडी घरसे वह दिलसे खत्म करी सारी अब याद हुजुरकी है मनमे तुकड्या यह नाम गँवानेको || ३ ||

गुरुराज दयाल ! दया करके

गुरुराज दयाल ! दया करके ,  मोहे भवसारसे पार करो || टेक || नाम तुम्हारा पावन है ,  इन तीनों लोक - सराइनमें ।  पाप कटाकर दीननका ,  यह नौका पार उतार करो ॥ १ ॥  भूला हूँ जगबीच खड़ा ,  कोइ आस - मिटावन देख रहा ।   आप बिना दुसरा न दिखे ,  जग तारक ! दास - उद्धार करो ॥ २ ॥  लख चौरासी भूल पड़ा ,  बिरला मानुज - तन पाया हूँ ।   फिरसे न मिले यह बक्त गया ,  अब जन्म - मरनसे हार करो ॥ ३ ॥  आस तेरी घरके यहाँपे ,  दिन दास भिखारी आया हूँ   वह तुकड्यादास भुला सुधरो ,  वरदानसे मन मार करो ॥ ४ ॥ 

देखु किधर प्रभुजी

देखु किधर प्रभुजी !  तुमको मेरि आँख  भुली भटकी फिरती ॥ टेक ॥  ढूंढलि है दुनिया नगरी ,  सब धाम फिरा जा - जा करके ।  नहि खोज मिली मुझको कुछ भी ,  अब मौत चली तनमें सिरती ॥ १ ॥  दिनरान तेरे मिलने के लिये ,  यह नैया तार लगाय रही ।  कहाँ तूर छिपाकर बैठे हो ?  मेरि बात सुनी न तुम्हें परती ॥२ ॥  ऊँच तेरा दरबार प्रभू !  मुझको न पता पाता तेरा । दिनानाथ ! कृपा कर आय मिलो ,  मनमें रखिये न सदा धिरती ॥ ३ ॥  तनमेंभी मिली या जनमें मिलो ,  अजि ! जनमें मिलो जलदी - जलदी ।  यह बक्त गया फिर भूल पडे ,  तुकड्याकी आँख चली जिरती ॥४ ॥ 

पुरण प्रेम बताकर के प्रभु

पुरण प्रेम बताकर के प्रभु !  आपसमे तकरार किया ॥ टेक ॥  आँख तुम्हीं बनवाई है ,  पर आँखनको नहि भेद दिया ।  ज्ञान दिया मुझको तबभी,  अब ज्ञानको कौन मिलायलिया ? ॥१ ॥ रसवाचा तुमरीहि बनी ,  उसे नाम - पुकार नहीं चखिया |  तेरो अधार सभी तनको ,  उससे परमारथ क्यों न लिया ? ॥ २ ॥ तुमही तन हो तुमही मन हो तुमही तन-चालक मान लिया फिर यह तकरार नही करना तुकड्या भ्रमसे भुलवाय दिया || ३ ||